“मैं हिंदी भाषी बंगाली हूं, मेरी लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ है, मैं एक मजबूत दावेदार हूं” : अच्छे लाल यादव


हुगली / 10 अप्रैल ( मोहम्मद शबीब आलम ) :
कभी कन्हाईपुर पंचायत के प्रधान रहे अच्छे लाल यादव ने कुछ समय पहले तृणमूल पार्टी से अलग होने का फैसला किया था। इस बार बीजेपी से टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन टिकट न मिलने के बाद उन्होंने उत्तरपाड़ा विधानसभा क्षेत्र से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।
अच्छे लाल यादव एक पुराने राजनीतिक नेता हैं और राजनीतिक परिवार से आने के कारण उनकी जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ है। इसी मजबूत जनाधार के सहारे वे अब निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। आज उन्होंने अपने कार्यालय में एक प्रेस मीट की।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि उनके सामने कोई बड़ा या भारी-भरकम नेता नहीं है। “कोई भी नेता नाम या पद से भारी नहीं होता, बल्कि इस क्षेत्र के लोग और वोटर ही किसी को बड़ा नेता बनाते हैं। उत्तरपाड़ा के लोग जिसे चाहेंगे, वही असली नेता होगा।”
जब उनसे पूछा गया कि तृणमूल, सीपीआईएम और बीजेपी—सभी पार्टियों के उम्मीदवार बंगाली हैं और आप गैर-बंगाली हैं, तो उन्होंने कहा:
“मैं हिंदी भाषी बंगाली हूं। यहां के लोग मुझे इसी रूप में जानते हैं। उत्तरपाड़ा के लोगों ने मुझे पहले भी आशीर्वाद दिया है।”
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा:
“मेरी लड़ाई उन नेताओं के खिलाफ है जो जीतने के बाद भी उत्तरपाड़ा के लिए कुछ नहीं करते। यह क्षेत्र विकास से वंचित रहा है और यहां के लोगों को नजरअंदाज किया गया है। मेरी लड़ाई ऐसे ही नेताओं के खिलाफ है।”
उन्होंने आगे कहा कि जैसे पहले लोगों ने उन्हें प्यार दिया, इस बार भी वे जनता के पास जाएंगे। “मुझे उम्मीद ही नहीं, पूरा विश्वास है कि यहां के लोग मुझे निराश नहीं करेंगे। मैं भ्रष्टाचार, अन्याय और अत्याचार के खिलाफ चुनाव लड़ रहा हूं। मैं उत्तरपाड़ा की प्रतिष्ठा बचाने के लिए मैदान में उतरा हूं, किसी पार्टी की चापलूसी या समर्थन के लिए नहीं।”
उन्होंने यह भी कहा कि कौन कहां से उम्मीदवार खड़ा करेगा, उन्हें नहीं पता, लेकिन इतना जरूर कहेंगे कि पहले की तृणमूल और आज की तृणमूल में काफी बदलाव आया है।
जब उनसे उनके भाई दिलीप यादव के बारे में पूछा गया, जो तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रह चुके हैं और जिला अध्यक्ष भी रहे हैं, तो उन्होंने कहा:
“दिलीप यादव मेरे भाई हैं और हमेशा रहेंगे। राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन भाई तो भाई ही होता है।”
बीजेपी में शामिल होने की चर्चाओं पर उन्होंने कहा:
“मुझे लगा कि मैं सिर झुकाकर राजनीति नहीं कर सकता, इसलिए मैंने अलग होने का फैसला किया। मैं अन्याय और अत्याचार के खिलाफ हूं। सच बोलना मेरी आदत है—अगर किसी को बुरा लगता है, तो मैं क्या कर सकता हूं?”
उन्होंने कहा कि उत्तरपाड़ा के लोगों ने ही उन्हें नेता बनाया है। “अगर जनता को उनका हक नहीं मिलेगा, तो मैं विरोध करता रहूंगा। पहले भी पार्टी के अंदर सच बोलने के कारण मुझे बदनाम किया गया था। जब मैंने देखा कि लोगों के अधिकार की बात करने पर मुझे दबाने की कोशिश की जा रही है, तो मैंने खुद ही अलग रास्ता चुन लिया।”
“मैं विरोध की भावना के साथ पैदा हुआ हूं। मेरे साथ जनता है, उत्तरपाड़ा के वोटर मेरे साथ हैं।”

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