एसपीके जैन फ्यूचरिस्टिक अकादमी में “माँ एंड मी” के साथ मनाई गई रवीन्द्र जयंती, गुरुदेव टैगोर और मातृत्व को समर्पित एक भावपूर्ण सांस्कृतिक संध्या



एसपीके जैन फ्यूचरिस्टिक अकादमी ने रवीन्द्र जयंती के अवसर पर ““माँ एंड मी”” – अ ट्रिब्यूट टू टैगोर: अ ग्रैंड सेलिब्रेशन ऑफ मदरहूद एंड अर्टिस्ट्री का आयोजन कर गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की विचारधारा, कला और मातृत्व के भाव को एक अनूठी सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की। साहित्य, संगीत, नृत्य और काव्य-पाठ से सजी इस विशेष संध्या ने दर्शकों को भावनाओं, संस्कृति और संवेदनाओं से जोड़ते हुए टैगोर के मानवीय दर्शन की गहराई को जीवंत कर दिया।

यह आयोजन गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की कालजयी साहित्यिक एवं दार्शनिक विरासत को समर्पित था, जिनकी रचनाएँ आज भी पीढ़ियों की सांस्कृतिक चेतना को दिशा देती हैं। रवीन्द्र जयंती के इस अवसर पर प्रस्तुत कार्यक्रमों में टैगोर के मानवतावादी विचार, मातृत्व की उनकी संवेदनशील अभिव्यक्ति तथा रिश्तों और भावनाओं के प्रति उनकी गहन समझ को विशेष रूप से उकेरा गया। संपूर्ण आयोजन ने कला, शिक्षा और जीवन के बीच सामंजस्य स्थापित करने की टैगोर की दृष्टि को सार्थक रूप से प्रतिबिंबित किया।

कार्यक्रम में शास्त्रीय नृत्य, कविता और साहित्य जगत की तीन प्रतिष्ठित हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही — विश्वप्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना एवं कोरियोग्राफर गुरु संचिता भट्टाचार्य, प्रख्यात कवि, स्तंभकार, अनुवादक एवं गीतकार तंमय चक्रबर्ती तथा प्रसिद्ध कवयित्री, लेखिका और वाचिका अनुराधा मजूमदार। इसके साथ ही श्री श्वेतांबर स्थानकवासी जैन सभा के सम्मानित सदस्यों तृप्ति सिंह, शशि कांकड़िया, श्रीमती कुसुम पटवा एवं तृशला भंसाली की उपस्थिति ने समारोह को और भी गरिमामयी बना दिया। अतिथियों ने अपनी विचारपूर्ण सहभागिता के माध्यम से विद्यार्थियों और उपस्थित जनों को टैगोर के साहित्य और मूल्यों से प्रेरित किया।

इस आयोजन को एक सार्थक सांस्कृतिक मंच के रूप में तैयार किया गया था, जहाँ विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव को प्रोत्साहित किया गया। प्रस्तुतियों और संवादों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि रवीन्द्रनाथ टैगोर के सृजनात्मकता, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों से जुड़े विचार आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, विशेषकर संवेदनशील और सामाजिक रूप से जागरूक व्यक्तित्व निर्माण में।

इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्या डॉ जयीता गांगुली ने कहा, “रवीन्द्रनाथ टैगोर का दर्शन कालातीत है और मानवता की भावना से गहराई से जुड़ा हुआ है। ‘माँ एंड मी’ जैसे आयोजनों के माध्यम से हम विद्यार्थियों को यह अनुभव कराना चाहते हैं कि संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक जीवंत शक्ति है, जो संवेदनशीलता, रचनात्मकता और भावनात्मक समझ को विकसित करती है।” वहीं विद्यालय के सचिव श्री जयदीप पटवा ने कहा, “हमारा उद्देश्य ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है जहाँ अकादमिक उत्कृष्टता के साथ सांस्कृतिक मूल्यों और संवेदनशीलता को भी समान महत्व दिया जाए। रवीन्द्र जयंती का यह आयोजन विद्यार्थियों को टैगोर के आदर्शों से जोड़ने के साथ-साथ सम्मान, प्रेम और कलात्मक अभिव्यक्ति जैसे मूल्यों को

कार्यक्रम के अंतर्गत माताओं और बच्चों की संयुक्त प्रस्तुतियों तथा आकर्षक रैम्प वॉक ने सभी का मन मोह लिया। इन गतिविधियों ने माँ और संतान के सबसे अनमोल रिश्ते को खूबसूरती से अभिव्यक्त किया। कला, साहित्य और भावनाओं के सुंदर समन्वय से सजी यह शाम दर्शकों के मन में गहरी छाप छोड़ गई। इस आयोजन के माध्यम से एसपीके जैन फ्यूचरिस्टिक अकादमी ने एक बार फिर समग्र शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत किया— ऐसी शिक्षा जो बौद्धिक विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना और भारतीय विरासत के मूल्यों को भी आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का कार्य करती है।

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