प्राइड मंथ के अवसर पर अनन्ता ने द लिटिल बिस्ट्रो में की मानसिक स्वास्थ्य, समावेशन और सामुदायिक कल्याण पर पैनल चर्चा की आयोजन
कोलकाता, ११ जून २०२६: प्राइड मंथ के अवसर पर, अपनी विशेष पहल के तहत, अनन्ता ने मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, LGBTQIA+ अधिकार कार्यकर्ताओं, सामुदायिक नेताओं और समुदाय के सदस्यों को एक मंच पर एकत्रित कर मानसिक स्वास्थ्य, समावेशन और भावनात्मक कल्याण पर सार्थक चर्चा आयोजित की। प्राइड केवल पहचान और दृश्यता का उत्सव नहीं है, बल्कि यह अपनापन, स्वीकृति और स्वयं के रूप में जीने की स्वतंत्रता का भी प्रतीक है। इसी भावना को केंद्र में रखते हुए आयोजित इस सत्र ने प्रतिभागियों को अपने अनुभव साझा करने, भावनात्मक दृढ़ता पर चर्चा करने और अधिक समावेशी एवं सहयोगी वातावरण बनाने की सामूहिक जिम्मेदारी पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान किया।
इस पैनल में प्रमुख वक्ताओं के रूप में फूड कंसल्टेंट एवं रिव्यूअर तथा LGBTQ कार्यकर्ता रुक्शाना कपाड़िया, अमोलाइट आइडिएटर्स की सह-संस्थापक एवं LGBTQ कार्यकर्ता सुनेहा साहा, प्रांतकथा के निदेशक एवं LGBTQ समर्थक बप्पादित्य मुखर्जी, तथा पेजेंट कोच एवं फैशन डिज़ाइनर इंद्रनील मुखर्जी शामिल थे। कार्यक्रम में LGBTQIA+ समुदाय के सदस्य और प्रांतकथा के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने अनुभवों और विचारों के माध्यम से चर्चा को और अधिक समृद्ध बनाया।
चर्चा में माधुरी सरदा, काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट, क्लिनिकल हिप्नोथेरेपिस्ट एवं अनन्ता की संस्थापक; विधि बंसल, सह-संस्थापक एवं साइकोथेरेपिस्ट, अनन्ता; तथा अत्रेयी चंद्रा, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट एवं अकादमिक एक्सीलेंस कोऑर्डिनेटर, अनन्ता ने भी सक्रिय भागीदारी की। यह कार्यक्रम द लिटिल बिस्ट्रो में आयोजित किया गया, जिसने अपने आत्मीय और सौहार्दपूर्ण वातावरण के माध्यम से सार्थक संवाद के लिए एक समावेशी मंच प्रदान किया।
विश्वभर में किए गए विभिन्न अध्ययनों से यह स्पष्ट होता है कि LGBTQIA+ समुदाय के लोग सामान्य आबादी की तुलना में चिंता, अवसाद, भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार जैसी चुनौतियों का अधिक सामना करते हैं। इसी संदर्भ में आयोजित इस चर्चा का उद्देश्य संवाद, जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से इन मुद्दों को सामने लाना था। पैनलिस्टों ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों, पेशेवर दृष्टिकोणों और सामुदायिक विचारों को साझा करते हुए बताया कि LGBTQIA+ समुदाय के कई सदस्य आज भी शैक्षणिक संस्थानों, कार्यस्थलों, स्वास्थ्य सेवाओं और पारिवारिक वातावरण में विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करते हैं। साथ ही उन्होंने कलंक, भेदभाव, सामाजिक अलगाव और मजबूत सहयोगी तंत्र की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
इस अवसर पर अनन्ता की संस्थापक, काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट एवं क्लिनिकल हिप्नोथेरेपिस्ट माधुरी सरदा ने कहा, "प्राइड केवल अपनी पहचान का उत्सव नहीं है, बल्कि यह ऐसे सुरक्षित और स्वीकार्य स्थानों के निर्माण के महत्व की भी याद दिलाता है, जहाँ लोग स्वयं को समझा हुआ और स्वीकार किया हुआ महसूस करें। मानसिक स्वास्थ्य तब बेहतर होता है जब लोग अपनी वास्तविक पहचान के साथ जीवन जी सकें और अपने समुदाय में अपनापन महसूस कर सकें। इस प्रकार की चर्चाओं के माध्यम से हम अधिक सहानुभूति को बढ़ावा देना, सामाजिक कलंक को कम करना और ऐसा वातावरण तैयार करना चाहते हैं जहाँ प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को मूल्यवान, सम्मानित और समर्थित महसूस करे।"
इस अवसर पर अनन्ता की सह-संस्थापक एवं साइकोथेरेपिस्ट विधि बंसल ने कहा, "मानसिक स्वास्थ्य और समावेशन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। जब लोगों को बिना किसी निर्णय, भेदभाव या बहिष्कार के भय के अपनी वास्तविक पहचान के साथ जीने की स्वतंत्रता मिलती है, तो यह उनके भावनात्मक कल्याण की मजबूत नींव तैयार करता है। इस प्रकार के मंच अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये न केवल लोगों के जीवन के वास्तविक अनुभवों को मान्यता देते हैं, बल्कि हमें सामूहिक रूप से एक अधिक संवेदनशील, सहानुभूतिपूर्ण और समावेशी समाज की दिशा में आगे बढ़ने में भी मदद करते हैं।"
द लिटिल बिस्ट्रो की मालिक ज़ारा चिश्ती आबेदीन ने कहा, “वास्तविक समावेशन केवल शब्दों में स्वीकृति देने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे दैनिक स्थानों—चाहे वे कार्यस्थल हों, कैफे हों या समुदाय—का निर्माण करना है जहाँ लोग स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और मूल्यवान महसूस करें। वास्तविक परिवर्तन तब शुरू होता है जब समावेशन केवल चर्चा का विषय न रहकर जीवन का हिस्सा बन जाता है।”
चर्चा का समापन संस्थानों, संगठनों और समाज से अधिक सहानुभूति, जागरूकता और ठोस कार्रवाई की सामूहिक अपील के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने इस बात पर बल दिया कि सार्थक समावेशन केवल प्रतीकात्मक समर्थन से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं ताकि हर व्यक्ति स्वयं को देखा, सुना, सम्मानित और मूल्यवान महसूस कर सके। विशेषज्ञों, कार्यकर्ताओं और समुदाय के सदस्यों को एक मंच पर लाकर अनन्ता की इस प्राइड मंथ पहल ने मानसिक स्वास्थ्य और समावेशन पर संवाद को प्रोत्साहित किया तथा यह संदेश दिया कि भावनात्मक कल्याण हर व्यक्ति का मूलभूत अधिकार है, चाहे उसकी लैंगिक पहचान या यौन अभिरुचि कुछ भी हो।
अनन्ता के बारे में
अनन्ता एक मानसिक स्वास्थ्य एवं वेलनेस संगठन है, जो जागरूकता कार्यक्रमों, परामर्श सेवाओं, चिकित्सीय हस्तक्षेपों और सामुदायिक सहभागिता पहलों के माध्यम से मनोवैज्ञानिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। अपने विविध कार्यक्रमों और आउटरीच गतिविधियों के माध्यम से अनन्ता समझ, भावनात्मक दृढ़ता और समग्र मानसिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करने वाले सुरक्षित एवं सहयोगी स्थानों का निर्माण करता है। माधुरी सरदा के नेतृत्व में यह संस्था मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ, समावेशी और कलंक-मुक्त बनाने के लिए निरंतर कार्यरत है। अत्रेयी चंद्रा, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट एवं अकादमिक एक्सीलेंस कोऑर्डिनेटर, इस मिशन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
द लिटिल बिस्ट्रो के बारे में
द लिटिल बिस्ट्रो एक विशेष रूप से तैयार किया गया कैफे स्पेस है, जो अपने गर्मजोशी भरे, समावेशी और स्वागतपूर्ण वातावरण के लिए जाना जाता है। स्वादिष्ट भोजन, आकर्षक प्रस्तुति और समुदाय-केंद्रित आतिथ्य के कारण यह केवल एक भोजन स्थल नहीं, बल्कि ऐसा सुरक्षित और अभिव्यक्तिपूर्ण स्थान बन गया है जहाँ बातचीत, रचनात्मकता और मानवीय संबंध स्वाभाविक रूप से विकसित होते हैं। समावेशन और मानवीय जुड़ाव को महत्व देते हुए द लिटिल बिस्ट्रो यह दर्शाता है कि दैनिक जीवन के सामान्य स्थान भी स्वीकृति, अपनापन और साझा अनुभवों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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